सेमेस्टर पद्धति: एक परिचय

मध्यप्रदेश शासन द्वारा 2008-09 से महाविद्यालय में स्नातक एवं स्नातकोत्तर प्रथम वर्ष में सेमेस्टर पद्धति लागू की गई है। इस पद्धति का लक्ष्य प्रदेश के समस्त महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों में एक समान न्यूनतम पाठ्यक्रम लागू कर 11वीं पंचवर्षीय योजना के अंतर्गत GER में 11.5 से 15 तक वृद्धि करना है। बेरोजगारी से निपटने के लिए महाविद्यालयीन शिक्षा के पश्चात् विद्यार्थियों को रोजगार के योग्य बनाना ही इस पद्धति का लक्ष्य है।

शासन द्वारा उच्च शिक्षा के क्षेत्र में सेमेस्टर प्रणाली निम्न उद्देश्यों की पूर्ति के लिए लागू की गई है:-

  • छात्र-छात्राओं का सतत् व्यापक मूल्यांकन करना।
  • प्रोजेक्ट, सेमीनार, एवं कार्यशालाओं के द्वारा विद्यार्थियों में शोध की प्रवृत्ति विकसित करना।
  • सेमेस्टर पद्धति में एक सम्पूर्ण सेमेस्टर में जॉब इंटर्नशिप का प्रावधान है, जिसका उद्देश्य विद्यार्थियों को कार्यानुभव दिलाना है।
  • सेमेस्टर पद्धति में एक सम्पूर्ण सेमेस्टर में जॉब इंटर्नशिप का प्रावधान है, जिसका उद्देश्य विद्यार्थियों को कार्यानुभव दिलाना है।
  • परिसर में अनुशासित शैक्षणिक वातावरण का निर्माण।
  • छात्र एवं शिक्षक के मध्य निरंतर संवाद होने से परिसर में आत्मीय वातावरण निर्मित होता है।
  • सेमेस्टर पद्धति में प्रत्येक छात्र को स्नातक कक्षा में अंत तक कम्प्यूटर में एम.एस. आफिस का ज्ञान अनिवार्य होता है। जिससे कम्प्यूटर से उनका परिचय होता है, जो वर्तमान समय की अनिवार्य आवश्यकता है।
  • छात्राओं के लिए आत्मरक्षार्थ जूडो, कराटे एवं अन्य मार्शल आर्ट का प्रशिक्षण सेमेस्टर पद्धति में अनिवार्य किया गया है।
  • विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास के लिए एन.सी.सी. या एन.एस.एस. में भाग लेना अनिवार्य किया गया है।

सेमेस्टर पद्धति में प्रत्येक शैक्षणिक सत्र में परीक्षा पद्धति निम्नानुसार होगी:-

  • दो सत्रान्त परीक्षायें।
  • दो सतत् व्यापक मूल्यांकन (Continuous Comprehensive Evaluation-CCE)
  • प्रत्येक विद्यार्थी को आवंटित परियोजना कार्य करना। स्नातक षष्टम तथा स्नातकोत्तर चतुर्थ सेमेस्टर मे विद्यार्थी को परियोजना कार्य करना होगा।
  • उक्त सभी परीक्षाओं, मूल्यांकनों एवं परियोजना कार्यों में विद्यार्थियों को अनिवार्यतः सम्मिलित होना होगा। इन परीक्षाओं में जो विद्यार्थी किसी विषय में न्यूनतम उत्तीर्णांक प्राप्त नहीं कर पाते हैं, उन्हें ए.टी.के.टी. प्राप्त होती है। उन्हें ए.टी.के.टी प्राप्त विषय हेतु परीक्षा आवेदन पत्र, शुल्क के साथ अलग से जमा करना होगा।

सी.सी.ई. एवं परियोजना कार्य महाविद्यालयीन व्यवस्था

  • सी.सी.ई. की परीक्षाएँ निर्धारित तिथियों मे सम्पन्न होगीं।
  • परियोजना कार्य निर्धारित तिथि के बाद जमा नहीं किये जायेंगे। इसकी व्यक्तिशः जिम्मेवारी छात्र की होगी। निर्धारित तिथि के बाद परियोजना कार्य जमा करने वाले परीक्षार्थी अनुशासनात्मक कार्यवाही के पात्र होंगे।
  • विशेष परिस्थिति में निर्धारित तिथि के बाद सी.सी.ई. एवं परियोजना कार्य में सम्मिलित होने का औचित्य, प्राचार्य महोदय को लिखित रूप में सूचित करना होगा।
  • निर्धारित तिथि के बाद, सी.सी.ई. एवं परियोजना कार्य में शामिल होने की सुविधा लेने वाले परीक्षार्थियों को, 200.00 प्रति विषय/प्रश्नपत्र सी.सी.ई. के लिए एवं 500.00 परियोजना कार्य के लिए अर्थदण्ड भरना होगा।
  • अर्थदण्ड जमा करके सी.सी.ई. अथवा परियोजना कार्य में शामिल होने की यह सुविधा, परीक्षार्थियों को, निर्धारित तिथि से पन्द्रह दिन बाद तक ही प्राप्त हो सकेगी।
  • सी.सी.ई परीक्षा के प्राप्ताँक विद्यार्थियों को परीक्षा के एक सप्ताह के अंदर बतलाए जाते हैं तथा उत्तर पुस्तिकाएँ (जहाँ लिखित परीक्षा ली गई है) अवलोकनार्थ दी जाती है। अंकों के संबंध में जिज्ञासाओं का समाधान, परीक्षा संपन्न होने के एक माह तक ही संबंधित शिक्षक से किया जा सकेगा।
Copyright © 2016 All rights reserved
Powered by Yash Associate